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लेखनी कहानी -01-Aug-2023 वो हमसफ़र था, एपिसोड 46

सीमा जी, अपनी बेटी को इस तरह रोते देख थोड़ा घबरा जाती है,,, और उसके सर पर हाथ फेराते हुए कहती है " क्या हुआ मेरी बच्ची,,, इस तरह क्यूँ रो रही है? किसी ने कुछ कहा है क्या? "

आँचल,,, उसके होंठ तो मानो सिल से गए थे,,, बस सिसकियाँ भर रही थी,,, उसका मन कर रहा था बस यूं ही माँ के सीने लगी रोती रहे,,, माँ उससे कुछ भी ना पूछे,,, लेकिन वो माँ है,,, माँ कहा चेन से बैठने वालो में से होती है,,, वो तो बच्चें की खरोच लगने तक की वजह को ज़ब तक मालूम नही कर लेती तब तक चेन से नही बैठती यहां तो वो रो रही थी उसकी हालत बता रही थी कि कुछ बुरा हुआ है उसके साथ तब वो कहा चेन से बैठने वालो में से थी

वो कुछ कहती या पूछती उससे पहले ही उनकी नजर अपनी बेटी के पैर पर गयी,,, जो कि खून से लाल हो गया था,,, खून देख सीमा जी ने आँचल को अपने सीने से हटाया और उसे कमरे के अंदर ले आयी और बेड पर बैठाते हुए बोली " हाय! राम तुझे कितनी गहरी चोट लगी है,,, तू बैठ यही मैं अभी डेटोल और पट्टी लेकर आती हूँ,,, और ये तूने कमरे का क्या हाल बनाया है,,, हाय राम सब कुछ तोड़ दिया,,, ऐसा भी क्या हुआ है,, कि तूने सब कुछ तोड़ दिया और खुद को भी घायल कर लिया "

आँचल ने अपनी माँ की तरफ देखा और नम आँखों से बोली " माँ! सब कुछ बर्बाद हो गया,,, कुछ नही रहा "

उसने जिस अंदाज़ में कहा, उसे सुन सीमा जी ने उसकी तरफ देखा और बोली " क,, क,,, क्या हुआ,,? क्या बर्बाद हो गया,, "

"माँ,, सब कुछ,,, कुछ भी नही रहा " आँचल ने कहा।

उसके इस तरह कहने पर,, सीमा जी उसके पास बैठी और इधर उधर देखने लगी,,, उन्होंने नजर बचा कर उसकी गर्दन और जिस्म पर देखना चाहा क्यूंकि जिस तरह से वो सब कुछ बर्बाद होने वाली बात कह रही थी उन्हें लगा की शायद आँचल के साथ कुछ ऐसा वैसा हुआ है,,, जिसे वो बताने से डर रही है

इसलिए उन्होंने जाकर पहले तो दरवाज़ा बंद किया,,, अपनी माँ को दरवाज़ा बंद करते देख आँचल को थोड़ा अजीब लगा और फिर वो नजदीक आकर उसके जिस्म को देखने लगी,,, मानो वो कुछ ढूंढ रही हो,,, कुछ निशान,, उन्हें ऐसा करते देख आँचल को थोड़ा अजीब लगा और वो उनसे दूर हटते हुए बोली " छी,,, ये क्या कर रही हो तुम,,, माँ,,, मुझे घिन आ रही है,,, "

सीमा जी ने थोड़ा दूर हटते हुए कहा " देख आँचल,,, सच सच बता तेरे साथ किया हुआ है,,, तू भी बच्ची नही है,,, तू भी सब जानती है कि मैं क्या देखने की कोशिश कर रही हूँ,,, सच सच बता तेरे साथ रात क्या हुआ है,,, कौन थे वो,,, "

"छी!माँ,,, ये तुम क्या कह रही हो,,?ऐसा वैसा कुछ नही हुआ है,, जैसा तुम समझ रही हो,,," आँचल ने कहा।

"तो फिर तेरा मतलब क्या है,,, कि सब बर्बाद हो गया,,, " सीमा जी ने कहा।

अपनी माँ को ये बात कहते देख आँचल ने उनकी तरफ देखा और उन्हें गले लगाते हुए बोली " माँ! हंशल ने किसी और लड़की को प्रोपोज़ कर दिया है,,, वो किसी और से प्यार करता है,,, मेरे लिए वो सब कुछ था लेकिन मैं उसके लिए कुछ नही "

"क्या,,, क्या कह रही है तू? तू होश में भी है " सीमा जी ने कहा।

"काश,, होश में ना होती,,, काश ये सब एक सपना होता जो सुबह होते ही टूट जाता,,,, लेकिन अब ये एक हकीकत है,,, लेकिन मैं इसे हकीकत बनने नही दूँगी,, नही दूँगी बनने,,हंशल मेरा था और मेरा रहेगा,, " आँचल ने गुस्से से कहा।

सीमा जी को भी यकीन आ गया था, आँचल की बात पर,,, अब उनके पास आँचल को समझाने के अलावा कुछ नही था,, आँचल का जो व्यवहर वो देख रही थी वो किसी खतरे की और इशारा कर रहा था,

इसलिए वो उसे समझाने की कोशिश कर रही थी,, लेकिन आँचल अपनी जिद्द पर अड़ी हुई थी जिसके चलते उन्होंने खींच कर एक चाटा मारा और बोली " पागल हो गयी है क्या? क्या उन दोनों के चककर में अपनी जिंदगी बर्बाद करेगी,, नही था वो तेरी किस्मत में तो क्या अब किस्मत से लड़ेगी,,, अच्छा हुआ जो समय रहते ही पता चल गया,,, अगर हम उनके घर चले जाते और तब पता चलता तब कितनी बदनामी सी लगती हमें और तेरे पापा को,,, अब उन्हें समझाना थोड़ा आसान तो होगा "

"लेकिन मेरा क्या माँ,,,? मेरा क्या? मेरा क्या कसूर? मैं भी तो हंशल से प्यार करती हूँ,,, मेरा भी तो उस पर हक़ है ना,," आँचल ने कहा।

"बेटा,,, तेरा प्यार एक तरफा था,,, एक तरफा प्यार की कोई मंजिल नही होती है,, जबकी उन दोनों का प्यार एक दुसरे के लिए है,,, शायद भगवान ने उन दोनों को एक दुसरे के लिए ही बनाया हो,,, तू तो भगवान का शुकर अदा कर कि वक़्त रहते ही तुझे सब पता चल गया,,, दुनिया में हंशल कोई आखिरी लड़का तो नही है ना,,,और भी भतेरे लड़के है " सीमा जी ने कहा।

"माँ,,, भले ही दुनिया में भतेरे लड़के है,, लेकिन जिससे प्यार हो उससे अच्छा कोई नही लगता है,,, तुम बात समझ क्यूँ नही रही हो,,, " आँचल ने कहा।

"बेटा समझ सकती हूँ,, लेकिन क्या कर सकते है? हंशल कोई प्लास्टिक का गुड्डा नही है एक जीता जागता इंसान है,,, और इंसान के अंदर भावनाएं होती है जज़्बात होते है,,, जिनपर उसका कोई इख़्तियार नही होता है,,, वो कब कहा किसके लिए जाग्रत हो जाए कुछ नही कह सकते,,, जिस तरह तेरे अंदर हंशल को लेकर फीलिंग्स है उसी तरह हंशल के दिल में उस लड़की को लेकर होंगी,,, इस दिल पर किसी का जोर नही चलता है,,, तू इस बात को समझ क्यूँ नही रही है,,, मेरी बेटी खुद को तकलीफ मत दे,,, जो हुआ उसे भूल जा,,, अब उन दोनों के बीच मत आ,,, मैं तेरा साथ इसलिए दे रही थी कि तुझे हंशल से प्यार था,,, लेकिन अब ज़ब हंशल को किसी और से प्यार है उसने उसे अपना हमसफ़र चुन लिया है तब तेरा साथ देना मात्र बेवकूफी है,, इसलिए मैं ये बेवकूफी नही करुँगी और ना ही तुझे करने दूँगी,,,, अगर तूने कुछ ऐसा वैसा किया उन दोनों को कुछ चोट पहुंचाने की कोशिश की तो मैं भूल जाउंगी कि मैं तेरी माँ हूँ,,, जाकर हंशल को सब बता दूँगी कि कोई है जो उनके प्यार के बीच आना चाह रहा है,,, फिर तू उसकी दोस्ती की भी हक़दार नही रहेगी फैसला तेरे हाथ में है,,, तुझे एक तरफा प्यार के हाथों कटपुतली बन कर खुद को बर्बाद करना है,,, या अपनी माँ की बात मान कर इन सब झंझट से आजाद होना है,,, एक नई जिंदगी में कदम रखना है " सीमा जी ने थोड़ा गुस्से में कहा।

अपनी माँ को इस तरह देख,,, आँचल ने खुद पर थोड़ा काबू किया और बोली " माँ! तुम तो मुझे समझो,,, इस तरह तो न कहो "

"समझती थी,,, तुझे भी और तेरे प्यार को भी इसलिए न चाहते हुए भी तेरे पापा से भी बात की,,, लेकिन बेटा अब तू ही सोच,, जिससे तू प्यार करती है वो किसी और से प्यार करता है,, इस तरह कोई रिश्ता कैसे चल सकता है,,, और पति पत्नि बन कर तो बिलकुल भी नही,,, पति पत्नि के रिश्तों को सींचने के लिए प्रेम की जरूरत होती है,,, ज़ब वो ही न हो तो फिर वो रिश्ता किसी काम का नही,,, साथ रह लेने से साथ सो लेने से कोई पति पत्नि नही बान जाते, दोनों के दिलो में एक दुसरे के लिए मोहब्बत का होना जरूरी है,, जो की तेरे और हंशल के बीच अब कभी नही हो सकती,,, जिस तरह तू उससे प्यार करती है वो किसी और से प्यार करता है,, इसलिए तेरे लिए बेहतर यही होगा जो हुआ उसे भूल जा,, थोड़ा समय लगेगा लेकिन तू भुला देगी,,,अपने इस एक तरफा प्यार की किताब को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दे इसका कोई भविष्य नही है, मेरी बात मान मेरी बेटी खुद को इस नफ़रत की और हंशल को पा लेने की आग में मत झोंक,, प्यार पा लेने का नाम नही है " सीमा जी ने आँचल को अपने सीने से लगाते हुए कहा

आँचल को अपनी माँ की बातें सही भी लग रही थी और गलत भी,,, उस समय तो वो निशब्द थी,,, उसकी माँ तो उसका साथ नही देने वाली थी या तो उसे अपने प्यार को हासिल करने के लिए कोई दूसरी राह देखनी होगी,,, या फिर जैसा उसकी माँ कह रही है वैसा ही करना होगा,,, लेकिन ऐसा करना किसी हथियार डालने जैसा था,, खेर उस समय तो उसने माँ से वायदा कर लिया कि वो कोशिश करेगी वो और कुछ कहती तब ही बाहर से उसके पापा की आवाज़ आ गयी जो की नाश्ते की मेज पर बैठे नाश्ते का इंतजार कर रहे थे,, सीमा जी जल्दी से उसे भी मेज पर आने का कहती है,, वो मना करती है,,, लेकिन वो उसे अपनी कसम दे देती है,, जिसके चलते मजबूरन उसे जाना ही पड़ा नहा धोकर

वही दूसरी तरफ अभिनव जो की जाग गया था,,, और अभीर के पास जाना चाहता था, लेकिन मारथा ने बताया की वो अभी सो रहा है,,, इसलिए वो उसके पास नही गया

आखिर कार,, थोड़ी देर बाद अभीर भी उठ जाता है,,, उसका सर चकरा रहा था,,, उसे कुछ भी याद नही था और न ही समझ आ रहा था कि उसके साथ क्या उसे शराब से पहल का तो सब याद था,, कि क्यूँ आखिर वो क्लब गया था लेकिन उसके बाद का उसे कुछ याद नही था,,,,वो बिस्तर से उठ जाता है,,, उसकी नजर अपने हाथ पर जाती है जिसपर पट्टी बंधी हुई थी,

वो ज़ोर से चीखता है,,, उसकी आवाज़ सुन सब लोग जिसमे मारथा,, अभिनव और शालू उसके कमरे की और दौड़ते है,,, बाकी यश और विक्रम दफ्तर चले गए थे उन्हें अभीर के बारे में कुछ नही पता था बस इतना मालूम था कि वो रात थोड़ा देर से आया था और शायद दोस्तों ने उसे पिला दी थी

सब लोग उसके कमरे की और दौड़ते है,,, उसका दिमाग़ घूम रहा था,,, अभिनव जाकर उसे संभालता है,,, और उसके लिए निम्बू पानी लाने का कहता है,,, मारथा नौकर से कहकर नीम्बू पानी मंगाती है

अभीर अपनी हालत और अपनी चोट के बारे में पूछता है,, लेकिन अभिनव उसे उस समय कुछ नही बताता है,, और नीम्बू पानी पीने को कहता है,,, ताकि उसका हैंगओवर उतर जाए, शालू इस तरह अभीर की खिदमत अभिनव को करते देख जल रही थी,,, उसे समझ नही आ रहा था कि उसके बेटे को क्या हो गया कल तक तो वो उसके नजदीक भी नही भटकता था और आज है कि उसकी खिदमत कर रहा है

जबकी मारथा दोनों भाइयो को देख खुश हो रही थी,,, हंशल फिर सो जाता है,,, सब लोग बाहर चले जाते है

शालू,, अभिनव का हाथ पकड़ कर कमरे में ले जाती है और उससे कहती है " ये तू क्या कर रहा है? अपने बाप जैसा क्यूँ बनता जा रहा है,,, क्यूँ उसकी गुलामी पर उतर आया है "

"क्या माँ? तुम भी ना,,, भाई है वो मेरा,,, मैं उसे सहारा नही दूंगा तो कौन देगा " अभिनव ने थोड़ा तंस भरे अंदाज़ में कहा।

"क्या कहा? भाई है वो तेरा,,, ये भाई प्रेम कब से जाग गया,,, कही तू भी अपने बाप के नक़्शे कदम पर तो नही चलने लगा,," शालू ने कहा।

"नही माँ,, क्या बात करती हो? वो बाप है मेरा,, मुझे तो उससे एक कदम आगे चलना चाहिए ना कि उनके नक़्शे कदम पर " अभिनव ने कहा।

"क्या मतलब तेरा इस बात से?" शालू ने कहा।

"देखती जाओ,,, मोम,,, बस देखती जाओ,, तुम्हारा बेटा क्या करता है,,," अभिनव ने एक गहरी सास लेते हुए कहा।

"कुछ ऐसा वैसा मत कर देना,,, जिसके चलते हम इस घर से भी चले जाए,,, फैक्ट्री तो जा चुकी है,,, बिज़नेस तेरे बाप के हाथों से निकल कर उनके भतीजे को मिलने वाला है,," शालू ने कहा।

"क्या,,, फैक्ट्री बिक गयी,,? ये कब हुआ " अभिनव ने कहा।

"तेरे बाप ने बताया था मुझे कि तेरे ताया उसे बेचने की बात कर रहे है,,, ज़ब बात निकाली है तो बिक भी जाएगी हमें कौन सा पता चलेगा,,,हमारे हाथ में तो वो चंद कोड़िया रख दी थी उन्होंने जिसकी कीमत आज करोडो में है,, अब पूरी फैक्ट्री भी उनकी,,, बिज़नेस भी बेटे का,,, तेरा बाप वो नौकर,, और तू भी अब वही कर रहा है " शालू ने कहा।

"नही माँ,,, भले ही मेरी रगो में खून मेरे बाप का है,,, लेकिन जन्मा तो तुम्हारी कोख से हूँ,, रगो में खून के साथ साथ दूध तो तुम्हारा भी है,,, इसलिए फ़िक्र मत करो फैक्ट्री भी हमारी होगी ये घर भी और बिज़नेस भी,,, "अभिनव ने कहा।

"सदके जाऊ,,, बस इसी दिन के लिए तो मैंने तुझे पाल पोस कर बड़ा किया था,,, कि कोई दिलवाये या ना दिलवाये लेकिन औलाद तो अपनी माँ को उसका हक़ दिलवाकर ही रहेगी,,, शाबाश मेरे बेटे शाबाश..." शालू ने कहा और उसे सीने से लगा लिया

अब बस अभिनव को अभीर के पूरी तरह होश में आने का इंतजार था,,, जिससे वो उसे हंशल के खिलाफ तैयार कर सके,,, उसे इस तरह हंशल का दुश्मन बना देगा कि वो दोनों ही एक दुसरे के जान के प्यासे बन जाएंगे ज़ब बात मेहबूबा की हो तो मेहबूब क्या कुछ नही कर सकता,,, क्या पता वो हंशल का कत्ल ही कर दे,, और खुद जैल में चला जाए इस तरह सब कुछ उसी का हो जाएगा एक तीर से दो निशाने लग जाएंगे हंशल से बदला भी मिल जाएगा और माँ को उसका हक़ भी मिल जाएगा

क्या अभिनव अपनी साजिश में कामयाब हो पायेगा,, जानने के लिए पढ़ते रहिये

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